अथातो भ्रम जिज्ञासा
कहते हैं की दवा जितनी कड़वी होती उतना ही लाभकर। विषस्य विषमौषधम् ( विष की दवा विष ही होती है )। एक समय था जब कांग्रेस पार्टी ने स्वदेशी आन्दोलन चलाया था ; आज एक विदेशी ही उसका सिरमौर है। भारत में पितृ-पक्ष में लोग पितरों ( पूर्वज ) को श्राद्ध देते है...
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अनुनाद सिंह
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[20 Aug 2008 08:50 AM]



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