ज्ञान केवल अंग्रेजी की बपौती नहीं है

प्रतिभास महाभारत के बारे में कहा जाता है कि " यद् इहास्ति तद् अन्यत्र , यद् न इहास्ति तद् न क्वचिद " ( जो यहाँ है वह अन्यत्र हो सकता है , लेकिन जो यहाँ नहीं है वह कहीं नही है ) । यह बात शायद धर्म के बारे में कही गयी है। किन्तु इसी तरह का वक्तव्य कुछ लोग अंग्र... [पूरी पोस्ट]
writer अनुनाद सिंह
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[21 Aug 2008 02:52 AM]

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