चंद ज़रूरी लोगों के नाम
कितना कुछ बदल गया? कुछ लोग आगे निकल गये, कुछ रह गए पीछे साथ कोई न रहा, शांत लहर के नीचे जन्म ले रही हैं मछलियाँ शहर चमचमाकर नए हो गए मगर पुरानी पड़ गईं उनकी स्मृतियाँ, बासी किताबों पर पीलापन चढ़ गया और बाकी बचे खतों को कुतर रही है उदासी, ढहती दीवारों प...
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महेन
कविता-अकविता
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[06 Nov 2008 22:00 PM]



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