घुन्ना
मैं प्रेम-गीत पढ़ता हूँ और हँस देता हूँ क्या मैनें लिखी कोई कविता तुम्हारे नाम? या गुलदस्ते में सजाकर दिया था तुमनें अपना प्रेम? हम जानते थे प्रेम-कविताओं की क्षुद्रता हँसते थे और हँसते-हँसते रो देते थे तब प्यार हमें ले गया था वहाँ हर चीज़ जहाँ से छोटी...
[पूरी पोस्ट]
महेन
कविता-अकविता
4
0
0
0
0
[17 Nov 2008 10:40 AM]



Shuffle








