अफ़सोस और उम्मीद के गीत

मेरी बतियाँ ऐसे समय में मुझे ब्रेख़्त से ज़्यादा कुछ नहीं सूझ रहा… वे जो शिखर पर बैठे हैं, कहते हैं: शांति और युद्ध के सार तत्व अलग-अलग हैं लेकिन उनकी शांति और उनका युद्ध हवा और तूफ़ान की तरह हैं युद्ध उपजता है उनकी शांति से जैसे मां की कोख से पुत्र मां की डरावनी श... [पूरी पोस्ट]
writer महेन

ब्रेख़्त

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[03 Dec 2008 14:29 PM]

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