बल बल जाऊँ मैं तोरे रंगरेजवा
एक पोस्ट में मैनें कहा था कि कुछ रचनाओं में अमरत्व के गुण होते हैं। ग़लत नहीं कहा था। इस बार " छाप तिलक सब छीनी " कैलाश खेर की आवाज़ में सुना और फिर से प्रभावित हुआ। कैलाश की आवाज़ भी उतनी ही दिलकश है जितना ख़ुसरो का लिखा दिलफ़रेब है। (बीच में कबीर भी शाम...
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महेन
कैलाश खेर
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[07 Dec 2008 12:00 PM]



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