तेरी याद का एक पौधा

kuch ehsaas अपने दिल के गुलशन में मैंने रोपा था तेरी याद का एक पौधा मोहब्बत की खाद अश्कों के पानी से सींच सींच कर पाला बड़े प्यार से आज बड़ा हो गया है मेरा ये पौधा देख,कितने फूल आये हैं इसमें और तू बिखर गयी है फिजा में खुशबू बन के..... जाते जाते समेट ली थी तुम्ह... [पूरी पोस्ट]
writer pallavi trivedi

नज़्म

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[16 Nov 2008 23:13 PM]

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