सपनों के रहस्य-लोक की परतें

Srijan Shilpi अपने एक मित्र से मिलने गया था। उनके कार्यालय की दीवार पर टँगे एक वाक्य पर नज़र गई। लिखा था, “सपने वे नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।” उस वाक्य में निहित प्रेरणा देर तक मन में गूंजती रही। किंतु... [पूरी पोस्ट]
writer Srijan Shilpi
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[21 Jun 2008 21:30 PM]

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