नौकरी
ज़िन्दगी के मायने में इस तरह घुस गई है कि इसके होने से मेरा होना तय है नहीं तो सब बेबात है! ये करती है तय कि तुम्हें कितना आदर मिलना चाहिए मेरे सम्मान का सूचक है नौकरी! न तो मेरी जेब भारी है न ही मेरी ज़बान जानती है कैसे करते हैं चापलूसी, फिर कैसे मि...
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अपराजिता
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[07 Jun 2009 07:03 AM]



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