उनकी आँखें
बाँट लिया करती हैं, उनकी आँखें. चुपके से हौले से न जाने क्या छोड़ दिया करती हैं उनकी आँखें. भाँप लिया करती है मेरा ग़म मेरी उदासी मेरी बौखलाहट, मन तक टटोल लिया करती है उनकी आँखें. उनकी आँखें जिनमें ज़िंदगी है रंग है सपने हैं जो संग है, सच कहूँ मेरा आ...
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अपराजिता
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[11 Jul 2009 23:12 PM]



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