इधर से गुजरा था सोचा सलाम करता चलूं...
चुनाव के मौसम पर गर्मी का मौसम भारी पड़ने लगा है। मतदान की तारीख तेजी से नजदीक आती जा रही है, लेकिन चुनाव प्रचार उतनी गति नहीं पकड़ रहा है। वजह, मौसम की मार। हिम्मत जुटाकर, कार्यकर्ताओं को जोश दिलाकर उम्मीदवार मैदान में निकलते भी हैं तो जनता इतनी '...
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रवीन्द्र रंजन
व्यंग्य
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[18 Apr 2009 17:10 PM]



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