जरूरतें ....
क्या कहें क्या न कहें जिंदगी को हाँ कहें या ना कहें बड़ी जालिम हैं जरूरतें इसे हम क्या कहें बनाती हैं पल में रिश्तों की डोर और गिराती हैं एकाएक जिंदगी भर की सोच ख़ुद पर पड़े तो धोखा है औरों को देना पड़े तो समझौता है...
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विनय जायसवाल
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[13 Jul 2008 01:54 AM]



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