रास्ता समझकर

आजकल गुजर जाता हूँ रास्ते से रास्ता समझकर मुनासिब नहीं समझता रुकना कोई वास्ता समझकर दौड़ता हूँ ऐसे जैसे जिंदगी रौद रहा हूँ... [पूरी पोस्ट]
writer विनय जायसवाल
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[20 Aug 2008 09:09 AM]

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