आजकल
देश का अपना रेत फिसले हाथ से खेत खेती छोड़ी घर छोड़ा नौकरी हो गई जीवन की रेख ... खुशियाँ गई आजादी खोयी पैसें के सपनों में बेचा सम्मान फिर भी अफसोस है आज पहली तारीख है खुश है जमाना कैडबरी खाकर अपना मन मारता है बच्चा एक तुकडे गुड के लिए .......
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विनय जायसवाल
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[18 Aug 2009 07:58 AM]



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