कुछ पुरानी यादें...

मन पखेरू फ़िर उड़ चला कुछ पुरानी यादें...धूमिल न हो जाये...आईये ले चले कुछ हँसने -हँसाने... आज हम भी कोशिश करते है ... तस्वीरे क्या बोलती है... कौन कहता है कि मुझमे लचक नही... मुसाफ़िर भाई ध्यान से कहीं कमर में झटका न आ जाये...:) खलिश भाई यह आपके लिये ही है... देखिये तस्वी... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[28 Jan 2008 04:20 AM]

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