एक कविता....

मन पखेरू फ़िर उड़ चला दोस्तों कल एक कविता सुनाने का मौका मिला ...आपके सामने प्रस्तुत है... आज़ादी की होली पहन वसन्ती चोला निकली मस्तानो की टोली आजादी की खातिर खेली दिवानों ने होली आज सजा है सर पे उनके बलिदानो का सेहरा चाँद सितारों से मिलता है नादानों का चेहरा आँख में आँसू... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू

अमर शहीदो के नाम

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[09 Apr 2008 15:24 PM]

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