पलकें बंद हो गई...

मन पखेरू फ़िर उड़ चला आँखों ने आँखों से कह दिया सब कुछ मगर जुबाँ खामोश रही... जब दिल ने दिल की सुनी आवाज़ धड़कन खामोश रही... आँखो के रास्ते दिल में उतरने वाले ऎ मुसाफ़िर अब बाहर जा नही सकते तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त उठती गिरती साँसे देख कर अब पलके बंद हो गई... सुनीता... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[01 Dec 2008 10:21 AM]

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