किस पर किया विश्वास

मन पखेरू फ़िर उड़ चला ऎक कविता के माध्यम से कुछ कहना चाहा है...देखिये सफ़ल भी हुई हूँ कि नही... फ़िर चली आँधी कि उड़ चले पत्ते सभी चरमराया पेड़ ऒ कुछ डालियाँ भी टूटे तभी चीं-चीं, चीं-चीं की चीत्कार जब फ़ैली आकाश में हो गई तत्काल गुम किसी अविश्वास में जैसे गिरा घोंसला उसका टूट... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[01 Dec 2008 10:21 AM]

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