एक नन्हा सपना

मन पखेरू फ़िर उड़ चला मन के आँगन की माटी को सौंप दिये अरमानों के बीज सौंधी खुशबू से लिपटे आशाओं के पानी से सीँचें स्वर्ण किरणों ने प्यार उड़ेला तब नन्हे-नन्हे अँकुर फ़ूटे मीठा-मीठा कोमल मखमली कोपल के जैसा अहसास हृदय में जागा विश्वास ने जड़े फ़ैलाई सुन्दर मधुर संगीत लिये फ़ैलात... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[20 Dec 2008 11:07 AM]

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