रास्ता और घर

बजार ये पुरानी है, पिछले साल जुलाई मे लिखी थी , पेश ऐ खिदमत है ... १ रास्ता सबका एक ही था लेकिन थोड़ा सा आगे जाने पर पता चला कि हम सबके रास्ते अलग थे कोई पहली श्रेणी का चलने वाला था जो चलने मे यकीन रखता था कोई दूसरी... जो छोटे रस्ते की तलाश कर रहा था और को... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल

मेरी आवाज़ सुनो

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[06 May 2008 02:52 AM]

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