क्रंदन (एक अधूरा गीत)
करुण क्रंदन से आह संपूर्ण विश्व है रोता, जग में भरी व्यथाओं की ज्वाला में है जलता, तम की गहन गुफा में, निस्तब्ध गगन के नीचे, घुट-घुट कर सिसक-सिसक कर जीवन क्योंहै रोता ! धूमिल होती आशाएं, परिचय बना रुदन है, निष्ठुर निर्दयी नियति म्लान हुआ जीवन है, स्म...
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Kavi Kulwant
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[11 Jul 2008 02:42 AM]



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