गज़ल
शैदाई समझ कर जिसे था दिल में बसाया । कातिल था वही उसने मेरा कत्ल कराया ॥ दुनिया को दिखाने जो चला दर्द मैं अपने, हर घर में दिखा मुझको तो दुख दर्द का साया । किसको मैं सुनाऊँ ये तो मुश्किल है फसाना दुश्मन था वही मैने जिसे भाई बनाया । मैं कांप रहा हूँ कि...
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Kavi Kulwant
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[16 Oct 2008 07:43 AM]



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