चाँद की सैर

कुछ हम कहें चाँद की सैर सुबह के सात बजते ही एफ़ एम गोल्ड पर पहले गाने की स्वर लहरियां गूंजी । " चांद को क्या मालूम चाहता है उसे कोई चकोर्…", अहा! जब दिन की शुरुवात इतनी मधुर है तो दिन तो मधुमास ही समझो। कार में रेडियो सुनने का मजा ही कुछ और है। बंद खिड़कियां, ए सी... [पूरी पोस्ट]
writer anitakumar
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[26 Sep 2008 20:47 PM]

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