ये साजिश है या कुछ और...?

मन खामोश हो गई है मुर्गे की बांग, अब सुनाई नहीं देती सुबह की अजान, सूरज भी अलसाता है अब चेहरा दिखाने से, मंदिर में भजन भी अब होने लगे हैं देर से, सब हो गए हैं किसी की साजिश के शिकार।... [पूरी पोस्ट]
writer मिथिलेश श्रीवास्तव
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[07 Aug 2009 10:35 AM]

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