तीस साल बाद

सरपंच मैं लेटा था अस्पताल के सफेद बिस्तर पर तुम्हें देख सकता था पर सुन नहीं झुर्रियों वाले हाथ की उंगलियां उठने को हुईं पर ताकत उम्र से मात खा गईं तुम स्तब्ध थीं तीस साल बाद देखा था शायद खोज रहीं थीं पुराने चेहरे की एक भी कतरन जो मिल जाये... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश त्रिपाठी
views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 May 2009 11:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix