खबरी की पांच छहनिकाएं
दीवार पर गढ़ी कील, दिल-दीवार, बाकी तुम..! बांस सा ज्वार, फनकार, बंसी की धुन! ----- चुक गए सवाल, सांस, मोक्ष- रंगीन पानी... तेरा अक्स... होश! ----- आहट, अकेलापन, डर- न तू, न मां, न घर! ----- खारा सागर, टूटी बोतल, जिन्न- कारे आखर, कोरे कागज, तेरे बिन!...
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देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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[14 Jun 2009 16:28 PM]



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