चलो कुछ उम्मीद ले आएं

varsha जो सर्जक हैं रचते हैं जीवन की बुनियादी शर्तें और गाते हैं चलो, उनसे उम्मीदों की उम्र सपनों की गहराई और उड़ान की ऊंचाई मांग लाएं अनाज की पूलियों की तरह लाद कर घर लाएं (ये कविता मैंने अपने कमरे की दीवार पर छपे पोस्टर से ली है। किसकी है ये पता नहीं। पर... [पूरी पोस्ट]
writer वर्षा
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[06 Dec 2008 03:05 AM]

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