कभी यूँ ही..
मेरी तन्हाई की हमराज़ तेरी रंग भरी याद! करती है वीरान दिल को आबाद ! तरीक ज़िन्दगी के, उफक को तेरी यादों के जुगनू रोशन करते हैं। लेकिन फ़िर भी कभी यूँ ही जाग उठती है सहसा वोही रूहानी प्यास। तुम्हारे करीब बहुत ही करीब आने की आस। जी चाहता है उसी तरह फ़िर...
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आशु
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[18 Nov 2008 23:23 PM]



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