यादें
फ़िर तेरी याद ने इतना मुझे रुलाया है। दर्द उतना ही बढ़ा जितना इसे दबाया है। आंसू छलके ही रहे रोज़ मेरी आंखों से, ज़ख्म जलते ही रहे बीती हुई बातों से, आज यह दिन भी मुझे प्यार ने दिखाया है। दर्द उतना ही बढ़ा जितना इसे दबाया है। तन्हाई में मुझे फ़िर अतीत...
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आशु
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[06 Dec 2008 01:49 AM]



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