क्या कहें?
मय जो हम ने मांगी साकी से पिलाई न गयी। सामने जाम था प्यास हम से बुझाई न गयी। क्या कहें अब जुबां ही चुप सी रहती है, क्या करें बात, बात हम से बनायी न गयी। जब भी गर्दन झुकाए तेरे आस्तां से गुज़रे हम, आँख उठायी तो सही, पर आँख मिलाई न गयी। माना के तुम भूल...
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आशु
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[09 Dec 2008 01:04 AM]



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