सागर किनारे...
शाम के झुट्पते में जब सूरज डूबता है सागर किनारे बैठा मैं, उस को निहारा करता हूँ जिस की सुनहरी किरणे रेत पर छिटक रही है तो लगता है मुझ को ऐसे जैसे एक मिलन हो रहा है जा हो रही हो जुदाई रात और दिन की रेत पर बैठा मैं कमज़ोर उँगलियों से तेरा नाम लिख देता ह...
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आशु
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[09 Dec 2008 01:22 AM]



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