संदेश बिरहन का..
ओ पंछी! यह संदेशवा दे दो जब तुम गुजरो पी की नगरिया। मोहे हर पल पी की याद सताए, मोरी छलक जाए है गगरिया। वोह कहते थे के आयेंगे अब के सावन में। एक अगन लगती जाए मोरे तन बदन में। लगन में उनकी मीठा सा दरद है मन में। धड़क जाए जियरा मोरा जब चमके वैरी बिजुरिय...
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आशु
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[09 Dec 2008 01:58 AM]



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