ज़िन्दगी की कड़ियों को...

Anjaana Shahar ...Ajnabee Log.. ज़िन्दगी की कड़ियों को, समेटना जो चाहा तो, समेट नही पाया मैं। लोग मिलते रहे और बिछड़ते गए। सपने बनते रहे और सिमटते गए। रिश्ते बनते रहे और टूटते गए। घाव रिस कर नासूर बनते गए। फ़िर ख़ुद को ख़ुद से, जोड़ना जो चाहा तो, जोड़ नही पाया मैं। यादें आती रही और ज... [पूरी पोस्ट]
writer आशु
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[12 Dec 2008 22:50 PM]

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