नहीं बदलूँगा शीर्षक.. हरगिज नहीं बदलूँगा

दरबार-ए-जालिम एक लड़के ने अचानक अपने हाथ से उसका स्तन मसल दिया. मैं स्तब्ध रह गया.. ब्लॉग की दुनिया में किसी कोई बहुत गड़बड़ आ गयी है. संवेदनाओं को समझने के बजाये पाठक प्रशनचिंह लगाने में यदा व्यस्त नज़र आते हैं. मैंने एक लेख लिखा था. मैंने यह लेख इसलिए लिखा था क्यो... [पूरी पोस्ट]
writer SUNIL DOGRA जालि‍म
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[27 May 2009 17:06 PM]

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