ऐसा भी क्या था गाँधी में...

दरबार-ए-जालिम जैसे जैसे मैंने होश संभाला, मेरे मन यह प्रशन गहराता गया कि आखिर उस अधनंगे फ़कीर ने ऐसा भी क्या किया था कि उसका इतना नाम हो गया. था क्या उसमें ऐसा.. सचमुच बापू ने जो किया वो सब तो स्यवं भगवान् भी धरती पर नहीं कर सके. जब बापू पढने के लिए इंग्लैंड जाने... [पूरी पोस्ट]
writer SUNIL DOGRA जालि‍म
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[27 May 2009 16:58 PM]

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