ब्रह्मदर्शन..
ज़िन्दगी को समझना है? सागर को तैरो तो उस पार पहुचो.. अरे डूब जाओ न आँखों में उसकी वही सत्य है फिर वही ब्रह्मदर्शन.. *** राजीव रंजन प्रसाद १५.०१.१९९६...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[02 Jul 2008 05:05 AM]



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