तुम भी सोचो..

सफर - राजीव रंजन प्रसाद एक बार देस में पंछी के दो चार चिरैये लड बैठे फिर आसमान में सीमायें बन गयीं अनेकों कैसे सूरज बटता लेकिन किसके हिस्से चांद सिमटता और हवाओं का क्या होता बैठ चिरैये सोच रहे थे तुम भी सोचो सीमा में क्या बंध जायेगा सब कुछ... *** राजीव रंजन प्रसाद... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[09 Jul 2008 00:28 AM]

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