कितनी कठोरता जानम..

सफर - राजीव रंजन प्रसाद पहाड से टकरा कर लौट आता है तुम्हारा नाम तुम से टकरा कर लौट लौट आती है मेरी धडकन कितनी कठोरता जानम कि पर्बत हो गयी हो.. *** राजीव रंजन प्रसाद... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[29 Jul 2008 10:44 AM]

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