अंधियारा चप्पल उतार कर मन के आँगन में आता है।
अंधियारा चप्पल उतार कर मन के आँगन में आता है। तुमने मेरी गुडिया तोडी, मैनें बालू का घर तोडा तुमने मेरा दामन छोडा, मैंने अपना दामन छोडा तुम मुझसे क्यों रूठे जानम, मैं ही टूटा, मैनें तोडा मुझको मुझसे ही शिकवा है, तुमसे मेरा क्या नाता है अंधियारा चप्पल...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[03 Aug 2008 03:36 AM]



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