ज़ुल्फें..

सफर - राजीव रंजन प्रसाद बांध कर न रखा करो ज़ुल्फें अपनी नदी पर का बाँध ढहता है तबाही मचा देता है एसा ही होता है जब तुम एकाएक झटकती हो खोल कर ज़ुल्फें.. *** राजीव रंजन प्रसाद... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[06 Aug 2008 02:25 AM]

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