सठिया गया है देश चलो जश्न मनायें।
गाँधी की नये फ्रेम में तस्वीर सजायें , सठिया गया है देश चलो जश्न मनायें।। हमने भी गिरेबाँ के बटन खोल दिये हैं थी शर्म, कबाड़ी ने रद्दी में खरीदी है बीड़ी जला रहे हैं अपने जिगर से यारों ये पूँछ खुदा ने जो सीधी ही नहीं दी है हम अपनी जवानी में वो आग लगा...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[15 Aug 2008 01:00 AM]



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