इतना सख्त भी नहीं पहाड
पहाडों के आगे बैठा हुआ मैं सोचता हूँ अगर तुम्हारा गम न रहा होता तो आज कितना बौना पाता मैं अपनें आप को और अब देखता हूँ इतना सख्त भी नहीं पहाड जितना मेरा दिल हो गया है.. *** राजीव रंजन प्रसाद...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[26 Aug 2008 01:30 AM]



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