मौत जब सनसनीखेज हो जाये
मेरे क्षेत्र में भूख से कोई मर नहीं सकता मीडिया के आरोपों से सांसद महोदय तैश में थे मानो घर के आगे उन्होंने लंगर खोल रखा हो। आंकडे "नेताईयत " की आत्मा हैं मगर कम्बखत परमात्मा तो वही नंगा है जो मर कर जी का जंजाल हो गया है... नेता जी गुरगुराये, माईकों...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[31 Aug 2008 00:15 AM]



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