मुट्ठी में एक तमंचा है अंकल...

सफर - राजीव रंजन प्रसाद नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है? मुट्ठी में एक तमंचा है अंकल मैंने इससे ही कत्ल किया है!! सुनता हूँ, गाना नये दौर का है सागर से दरिया पहाड़ों की ओर बहता चला है, कहता चला है पश्चिम से सूरज निकलना तय है बिल्ली ने अपने गले ही में घंटी बाँधी है... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[02 Sep 2008 01:00 AM]

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