‘कौन मैं’ 'कौंन तू’
वैदिक साहित्य में मानव और उसकी संस्कृति के विकास को रेखांकित करती असंख्य कथाएँ गुथी हुई हैं। आवश्यकता उनके सही अर्थ समझकर उनकी, आधुनिक संदर्भ में, नए सिरे से व्याख्या करने की है। पुराण और इतिहास को सृजन का आधार बनाया जाए या नहीं, इस पर दो मत हैं। एक...
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आशुतोष कुमार राय
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[27 Feb 2009 07:12 AM]



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