तनहा चला हूँ मै रहगुज़र में
तनहा चला हूँ मै रहगुज़र में भटक न जाऊ कही सफर में दिल चिराग बन के जला है अब तो चले आओ मेरे घर में कोई न सुने फरियाद मेरी पत्थर ही मिले है तेरे शहर में कहते हो तुम की खुदा याद रखू तुम ही खुदा हो मेरी नज़र में गुलो की थी उम्मीद उससे ' दयाल ' खर बिखेर दि...
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Rahul kundra
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[06 Apr 2009 05:04 AM]



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