जो यह शर्ते-तालुक है की है हम को जुदा रहना
जो यह शर्ते - तालुक है की है हम को जुदा रहना तो ख्वाबो में भी क्यो आओ , खयालो में भी क्या रहना शज़र ज़ख्मी उम्मीदों की अभी तक लहलहाते है इन्हे पतझड़ के मौसम में भी आता है हरा रहना पुराने ख्वाब पलकों से झटक दो , सोचते क्या हो मुकदर खुशक पतों का है शाख...
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Rahul kundra
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[10 Jul 2009 02:04 AM]



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