कही ऐसा न हो दामन जला लो
कही ऐसा न हो दामन जला लो हमारे आसूओं पर खाक डालो मानना भी ज़रूरी है तो फ़िर तुम हमें सब से खफा हो के माना लो बहुत रोई हुई लगती है ये आँखे मेरी खातिर ज़रा काजल लगा लो अकेलेपन से खौफ़ आता है मुझको कहाँ हो मेरे ख्वाबो खयालो बहुत मायूस बैठा हु मै तुमसे कभी...
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Rahul kundra
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[13 Jul 2009 05:15 AM]



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