यही नही की सदाए लगा के देखते है
यही नही की सदाए लगा के देखते है कुए में कौन है पत्थर हटा के देखते है गुलाम अब न हवेली से आयेगे लेकिन हुजुर अब भी ताली बजा के देखते है अजाफा होता है कितना हमारी इज्ज़त में रईस - ऐ - शहर को घर पर बुला कर देखते है अजहर इनायती...
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Rahul kundra
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[14 Jul 2009 00:54 AM]



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