कल्पनातीत-हिंदी शायरी (Unthinkable - Hindi poetry)
बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब याद आती है सुबह अखबार में छपी तरक्की की खबरें और उसे सभी में बांटने के लिये शोर करते लोगों के जूलूस की फोटो याद तब बरबस हंसी आ जाती है उनको कल्पनातीत प...
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दीपक भारतदीप
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[10 Sep 2009 11:35 AM]



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